Screen-Sharing Apps Alert: भारत में स्मार्टफोन अब हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, ऑफिस का काम हो या दोस्तों-परिवार से बातचीत—सब कुछ मोबाइल पर ही निर्भर हो गया है। लेकिन जैसे-जैसे मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ा है,
Screen-Sharing Apps scam: वैसे-वैसे ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल और साइबर अपराध के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। इस बीच कुछ ऐप्स ऐसे हैं, जो आपकी प्राइवेसी और पैसे दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
स्क्रीन-शेयरिंग Apps क्यों बन रहे हैं जोखिम
स्क्रीन-शेयरिंग और रिमोट एक्सेस ऐप्स का असली मकसद टेक्निकल सपोर्ट देना होता है, लेकिन आजकल साइबर अपराधी इन्हीं ऐप्स का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। ठग इन ऐप्स के जरिए रियल-टाइम में आपके पूरे स्मार्टफोन पर कंट्रोल हासिल कर लेते हैं।
एक बार अगर आपने एक्सेस दे दिया, तो वे आपके मैसेज, बैंकिंग ऐप्स, ओटीपी और निजी डेटा तक आसानी से पहुंच बना लेते हैं।
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ठग कैसे बिछाते हैं जाल
साइबर अपराधी अक्सर खुद को बैंक कर्मचारी, कस्टमर केयर एजेंट या सरकारी अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। वे किसी फर्जी समस्या का डर दिखाते हैं और आपसे स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करवाते हैं। जैसे ही ऐप एक्टिव होता है, वे आपकी हर गतिविधि पर नजर रखने लगते हैं।
कुछ ही मिनटों में खाली हो सकता है अकाउंट
एक बार फोन का एक्सेस मिलने के बाद ठग बैंक ट्रांजैक्शन देख सकते हैं, ओटीपी और पासवर्ड चुरा सकते हैं, निजी फोटो-मैसेज एक्सेस कर सकते हैं और बिना आपकी जानकारी के पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। कई मामलों में लोगों का अकाउंट कुछ ही मिनटों में खाली हो गया है।
खुद को सुरक्षित रखने के आसान उपाय
सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि बिना जरूरत स्क्रीन-शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप्स फोन में न रखें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई भी ऐप इंस्टॉल न करें।
ऐप डाउनलोड करते समय उसकी परमिशन जरूर जांचें और कभी भी ओटीपी, पासवर्ड या निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अगर कोई कॉलर जल्दीबाजी या डर पैदा करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें
अगर आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो देर न करें। तुरंत सरकारी वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। समय पर शिकायत करने से नुकसान कम किया जा सकता है।
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