Spinal Injuries Bladder Problems: रीढ़ की हड्डी में चोट मूत्राशय की समस्याएं: कारण, इलाज ;Expert Tips

Managing Spinal Injuries Bladder Problems: रीढ की हड्डी में चोट लग जाना एक बेहद गंभीर समस्या होती है जिसका एक मात्र कारण है स्पाइनल इंजुरी का अभी तक मेडिकल साइंस के दुनियां में कोइ कारगर इलाज का न होना। और जिस भी व्यक्ती को स्पाइनल कॉर्ड इंजुरी हो जाता हैं उसे कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं. जिसमे एक सबसे गम्भीर समस्या होती है मूत्राशय की समस्या। यानि मूत्र असंयम होना। जिसे आप आम भाषा में अपने पेनिस और मूत्र पर नियंत्रण का न होना बोल सकतें हैं.

Spinal Injuries Bladder Problems: रीढ़ की हड्डी में चोट मूत्राशय की समस्याएं: कारण, इलाज ;Expert Tips
Spinal Injuries Bladder Problems

कोइ भी व्यक्ती या महिला अगर बड़े हों गए है लेकिन रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के वजह से पेशाब पर कंट्रोल नहीं रख पाते है तो काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ता हैं हालाकी अब इसके कई सारे निदान उपचार हैं जो आप अपने प्रियजनों की हेल्प से आसन बना सकते हैं और देख भाल कर सकते हैं।

आज हम इस पोस्ट में, एससीआई में मूत्राशय की समस्याएं के बारे में विस्तार से बताएंगे साथ ही यह भी जानेंगे कि रीढ़ की हड्डी की चोट में मूत्राशय प्रभावित कैसे होती है, और Spinal Injuries Bladder Problems, मूत्राशय की समस्या गुणवत्ता सुधारने के लिए मूत्राशय प्रबंधन के बारे में जानेंगे।

Table of Contents

रीढ़ की हड्डी की चोट मूत्राशय की समस्याएं क्यों उत्पन्न होती हैं?(Spinal Injuries Bladder Problems )

रीढ़ की हड्डी की चोट मूत्राशय की समस्याएं क्यों उत्पन्न होती हैं?
Spinal Injuries Bladder Problems

Managing Bladder Problems After Spinal Cord Injury: मानव शरीर में जो मूत्राशय के भाग होते हैं, जो मूत्र को पहले संग्रहीत करता है, और फिर उसे मूत्र द्वार से त्याग करते हैं इन सभी प्रक्रिया को तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता हैं. और जभी किसी व्यक्ति को रीढ़ की हड्डी में चोट लगती है, तो वह व्यक्ती अपनें मूत्राशय को नियंत्रित करने वाली नसें को भी क्षतिग्रस्त कर देता है जो रीढ़ के हड्डी के चोट के बाद स्वतः हों जाती हैं.

रीढ़ की हड्डी की चोट में मूत्राशय के प्रकार:(Spinal Injuries Bladder Problems)

रीढ़ की चोट में मूत्राशय के कई अलग अलग प्रकार होते हैं जिसका एक मात्र कारण है चोट के स्तर का अलग अलग होना। अगर आपको चोट गर्दन के पीछे वाली हिस्से में लगा है तो इसे अत्यंत गम्भीर चोट का स्तर माना जाता है, वही आपको चोट पीठ के बिच में लगी है तो इसे अत्यंत गम्भीर चोट का स्तर नही माना जाता है।

और वही चोट का स्तर कमर के पीछे वाली हिस्से में लगा है तो उसे हल्का चोट माना जाता हैं जिसमे जल्द मूत्र पर नियंत्रण होने की संभावना रहती है। और इन्ही सब बातें को लेकर स्पाइनल इंजुरी में चोट के लेवल को तीन भागों में बांटा गया है:(Spinal Injuries Bladder Problems: )

पहला C1से C5 वाले चोट के स्तर ।

दूसरा D1 से D7 वाले चोट के स्तर

तीसरा L1 से L12 वाले चोट के स्तर

रीढ़ की हड्डी की किस स्तर की चोट मूत्र असंयम का कारण बनती है?

Spinal Injuries Bladder Problems: स्पाइनल कॉर्ड इंजुरी होने के बाद करीब 85% पीड़ित मरीज को अपने मूत्राशय पर नियंत्रण की कमी देखी गई  है, जिसे हम न्यूरोजेनिक मूत्राशय के नाम से जानते है।
अब यह सवाल आता है कि कौन सी चोट की लेवल के मरीजों को अपने मूत्राशय पर नियंत्रण नही रहता है तो इसका निम्न जवाब निचे दिए गए हैं:

L1 -L12 वाले व्यक्ति को।

D1-D7 वाले व्यक्ति को।

C1-C5 वाले व्यक्ति को।

मूत्राशय की नसें क्षतिग्रस्त होने के लक्षण। (Spinal Injuries Bladder Problems )

मानव शरीर में रीढ़ की हड्डी से आने-जाने वाले सभी तरह के संकेत तंत्रिका सुपरहाइवे के ज़रिए हमारे हेड के पास आते जाते हैं. और जब कोइ कोइ व्यक्ती पानी पिता है तो हमारी मस्तिष्क इसी मार्ग का उपयोग कर रीढ़ की हड्डी के माध्यम से मूत्राशय को संकेत भेजता है।(Spinal Injuries Bladder Problems)

कि अब मूत्राशय मूत्र से भर गया है, जिसके बाद हम उस मूत्र को त्याग कर देते हैं और यह सभी कार्यक्रम मूत्राशय के त्रिक मेरु तंत्रिकाएँ यानि S1, S2, S3, S4 के जरिए होता हैं।

रीढ़ की हड्डी की किस स्तर की चोट मूत्र प्रतिधारण का कारण बनती है?

T10 से L2 तक की स्पाइन :

इस रीढ़ की हड्डी के स्तर में परिधीय तंत्रिकाएं शामिल होते हैं।

मूत्राशय की ऊपर की मांसपेशियों में शिथिलता शामिल होते हैं।

मूत्र संवरणी संकुचन शमिल करते हैं।

मूत्र का भंडारण भी शामिल होते हैं.

S1 से S4 तक की स्पाइन:

इस रीढ़ की हड्डी के स्तर मे सनसनी शामिल होते हैं।

जलन या कड़क शामिल होते हैं।

स्वैच्छिक मोटर नियंत्रण भी शामिल होते हैं।

मूत्र का निष्कासन भी इसी लेवल में होती है।

रीढ़ की हड्डी की किस स्तर की चोट मूत्राशय को प्रभावित करती है?

अगर आपको स्पाइनल इंजुरी हुआ है तो यह आप मान ही लीजिए कि चोट का स्तर आपके रीढ़ के हड्डी में भले ही कोई भी क्यों न हों, लेकिन उस चोट का असर आपके मूत्राशय और अंडकोष पर होना स्वाभाविक है आप इस समस्या से बच नही सकते हैं. हालाकी आपके चोट के स्तर कम या अत्यंत गम्भीर होने की स्थिती में इसका प्रभाव कम या अधिक हो सकता हैं,(Spinal Injuries Bladder Problems)

जैसे – रीढ़ में चोट का स्तर कम होता है तो उससे आपको मूत्राशय और अंडकोष में समस्या भी कम रहतीं हैं वही रीढ़ में चोट के लेवल ज्यादा गंभीर होती हैं तो यूरीन प्रोब्लम और उससे होने वाली इंफेक्शन का होने का चांस रहता हैं।

Note:- मूत्राशय का कार्य स्पाइनल इंजुरी यानि SCI के स्तर और पूर्ण चोट या फिर अपूर्ण चोट के ऊपर निर्भर करता है।( Spinal Injuries Bladder Problems)

रीढ़ की हड्डी की चोट मूत्राशय नियंत्रण को कैसे प्रभावित करती है?

स्पाइनल कॉर्ड इंजुरी जभी किसी व्यक्ति या स्त्री को होते हैं तब जिस रीढ की हड्डी यानि लेवल में चोट लगती हैं तो उस स्थान के निचे के अंग काम परालयीज हों जाते है कोई भी चीज़ जैसे ठंडा गर्म का अहसास नहीं होता हैं न ही उस अंग पर हमारा नियंत्रण होता हैं जैसे मल मूत्र में भी नियंत्रण नहीं होते हैं.

सवाल आता है कि स्पाइनल इंजुरी के बाद मूत्राशय नियंत्रण पर क्या प्रभाव पड़ता है तो उसका जवाब हैं कि चोट का स्तर जीतना अधीक होगा, आपके मल मूत्र निष्कासन की समस्या उतना ही ज्यादा होगी।

स्पाइन TH12- L1 से ऊपर की चोटें: अगर आपको दिए गए लेवल के अंदर चोट लगी है तो आपको डिट्रसर स्फिंक्टर डिससिनर्जिया अथवा मूत्राशय को खाली करने मे और उसके नियंत्रित में असमर्थता पैदा होती हैं।(Spinal Injuries Bladder Problems)

स्पाइन TH12- L1 से नीचे की चोट: यदि किसी को इस लेवल के निचे चोट लगी है तो मूत्राशय और स्फिंक्टर की मांसपेशियों से पुरी तरह नियंत्रण खत्म हो जाती हैं। फिर मूत्राशय पूरी तरह खाली करने, मूत्र को रोकने या फिर मूत्र रिसाव को रोकने की क्षमता खत्म हो जाती हैं।

निचली रीढ़ की हड्डी की चोटें: अगर आपको या फिर आपके किसी अपने दोस्त को स्पाइनल कार्ड इंजुरी हुआ है और उसका लेवल गर्दन के निचे और पीठ के ऊपर हैं तो वह व्यक्ति मूत्राशय समस्या से पुरी तरह असमर्थत हों सकतें हैं।(Spinal Injuries Bladder Problems)

1. त्रिक तंत्रिका स्तर से ऊपर की चोटें🙁Spinal Injuries Bladder Problems)

अगर आपको इस लेवल में चोटे आई है तो आप जल्द ही अपने, मूत्राशय पर नियंत्रण पा सकते हैं हां लेकिन इसके लिए आपको मेहनत करनी होगी, अन्यथा निचे दिए गए निम्न कारण उत्पन्न हो सकते हैं:

  • अनैच्छिक मूत्र रिसाव
  • मूत्र संग्रहण में कठिनाई.
  • मूत्राशय की मांसपेशियों में संकुचन
  • मूत्राशय में ऐंठन या जलन।
  • मूत्राशय की मांसपेशी बहुत सख्त हो जाना ।
  • मूत्राशय के लिए मूत्र को रोकना
  • मूत्राशय रिसाव की संभावना है
  • बार-बार मूत्र पथ में संक्रमण
  • किडनी हाइड्रोनफ्रोसिस होना।
  • मूत्र का असंयम होना।

2. त्रिकास्थि तंत्रिका स्तर पर चोट:(Spinal Injuries Bladder Problems)

इस प्रकार की चोटें जब रीढ की हड्डी में लगती हैं, तो मरीज के मूत्राशय कार्य पर एक अलग ही असर पड़ता है, जिस वजह से मूत्राशय की मांसपेशी शिथिल हो जाती है और फिर मूत्राशय की प्रतिक्रिया ज्यादा प्रभावित होती है जिसके कई  परिणाम हों सकतें हैं.

  • मूत्राशय संवेदना.
  • पेशाब करने की इच्छा होना।
  • अनुबंध करने की क्षमता.
  • मूत्राशय में बहुत सारा मूत्र जमा होना।
  • मूत्राशय में मूत्र भरने की अहसास न होना।
  • मूत्र प्रतिधारण और पेशाब को बाहर निकालने में दिक्कत
  • पेशाब करने के लिए अतिरिक पेट के बल का प्रयोग।
  • मूत्राशय में प्रोस्टेट
  • मलाशय प्रभावित होता हैं।
  • स्त्रियों को गर्भाशय और श्रोणि स्नायुबंधन होती हैं।
  • तनावग्रस्त होना।
  • खांसने, हंसने या फिर छींकने पर रिसाव होने की संभावना रहती है।

रीढ़ की हड्डी की चोट के बाद मूत्राशय पर नियंत्रण पुनः प्राप्त करना।

रीढ़ की हड्डी में चोट के बाद मूत्राशय पर पुनः नियंत्रण पाना आसान तो नही है लेकीन नाममुकीन तो भी नहीं है. जिसके लिए आपको कई सारी कठिन और आसान काम करने होगें जो निचे दिए गए हैं:(Spinal Injuries Bladder Problems)

  • ब्लाडर थेरपी करे ।
  • अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।
  • योगा अभ्यास करें।
  • पेट को पचकाय और फुलाए।
  • कीगल एक्सरसाइज़ करें।
  • पेट का एक्सरसाइज़ करें।
  • ब्रिथिंग एक्सरसाइज़ करें।
  • कमर का एक्सरसाइज़ करें।
  • पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ करें।
  • मोशन का एक्सरसाइज़ करें।
  • पेशाब रोकने का कोशिश करें।
  • दिमाग से सोचे कि आप पेशाब कर रहे हैं।
  • माइंड में सेट करने का अभ्यास करें कि आप अपने मूत्र पर नियंत्रण पा रहे हैं।
  • मुंह में हवा भरे, और जोर से फूक मारे।
  • शंख बजाएं।
  • खुब पानी पिए।

रीढ़ की हड्डी की चोट और मूत्र असंयम के उपचार क्या हैं?

रीढ़ की हड्डी की चोट अलग अलग व्यक्ती में भिन्न भिन्न होते हैं और उनका मूत्राशय प्रभावित भी भिन्न भिन्न होते हैं और इसके लिए बेस्ट उपचार भी कई बार अलग अलग होते हैं निचे कुछ तरीके हमने दिए हैं जिनसे आप आसनी से अपने मूत्राशय के रिसाव को नियंत्रित कर सकते हैं तो आइए जानते हैं।

कैथेटर। एससीआई में मूत्राशय की समस्या को स्थिति को संभालने के लिए तथा मूत्र रिसाव को रोकने के लिए आप अपने डॉक्टर के बताएं गए कैथेटर का उपयोग कर सकते हैं आपकों बता दूं कि कैथेटर की कई अलग अलग प्रकार होते हैं जिसमे सबसे बेस्ट आंतरायिक कैथेटर , सुप्राप्यूबिक कैथेटर, इनडवेलिंग कैथेटर, बाहरी कैथेटर आदी का यूज कर सकते हैं.(Spinal Injuries Bladder Problems)

वयस्क या बाल चिकित्सा ब्रीफ। ब्रीफ (डायपर) मूत्राशय नियंत्रण के लिए उत्कृष्ट हैं क्योंकि वे शोषक होते हैं और किनारों पर टैब के साथ आसानी से खुलते हैं। यह आपको व्हीलचेयर का उपयोग करने या कम गतिशीलता होने पर आसानी से अपना ब्रीफ बदलने की अनुमति देता है। ब्रीफ उन लोगों के लिए सबसे अच्छे हैं जिनके पास भारी रिसाव है।(Spinal Injuries Bladder Problems)

वयस्क या बाल चिकित्सा पुल-ऑन। पुरुषों हों या फिर महिला दोनों के लिए, खास तरह के अंडरवियर की तरह दिखने वाली पुल-ऑन शोषक का इस्तेमाल कर सकते हैं जो आपके मूत्र रिसाव को दूर कर सकते हैं।

रीढ़ की हड्डी की चोट और मूत्र असंयम से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल कैसे करें ।

अगर आपके घर में किसी भी व्यक्ति या महिला को रीढ़ के हड्डी में चोट के वजह से मूत्र पर नियंत्रण नही है और उस कारण से मूत्र असंयम होता रहता है तो उससे घर के सभी लोगो के परेशानी होती हैं मरीज के साथ दूसरो को भी इंफेक्शन होने का चांस रहता है घर के बच्चे को बीमार होने का डर बना रहता है कपडे बार बार बदलने पड़ते हैं.

बिछावन गीले हों जाते हैं. और इससे मरीज को भी असंयम समस्याएं होती हैं, लेकीन आप इन तमाम तरह के समस्याओं से निपटारा पा सकते हैं. जिसे निचे दिए गए हैं:(Spinal Injuries Bladder Problems)

1. सही तरह के असंयम आपूर्तियाँ को घर में रखें।

जैसे – नॉर्मल कैथेटर, वयस्क ब्रीफ, कंडोम कैथेटर और पुल-ऑन तथा अंडरपैड जैसे को आप हमेशा अपने घर में रखें।

2. आवश्यक चीजों को बीमा करवाए : आजकल दिन प्रति दिन मेडिकल ट्रीटमेंट से जुड़ी चीजों दवाओ के दाम बढ़ते रहते हैं. और आप यूज वाले आवश्यक चीजों को अगर बीमा करवा लेते हैं तो आपको कैथेटर आपूर्ति, नॉर्मल कैथेटर, पुल-अप, , यूरीन थैली, दस्ताने बदलने, वयस्क ब्रीफ, वाइप्स जैसे अन्य चीज़ों की मासिक लागत काफी अधीक होंने से आप बचा सकतें हैं.(Spinal Injuries Bladder Problems)

3. मूत्राशय को परेशान करने वाले पदार्थों से बचें।  जैसे:-

चटपटा खाना।

चॉकलेट

तले हुए खाद्य पदार्थ।

चिकना सामान.

कॉफी

मीठे रस.

4. अचानक होने वाले दुर्घटनाओं के लिए तैयार रहें।

जैसे: साफ कपड़े, बदबू और दुर्गंध को छिपाने के लिए स्प्रे और एक डिस्पोज़ल बैग भी, ब्रीफ़ या कैथेटर आदी अपने साथ जरुर रखें।(Spinal Injuries Bladder Problems)

FAQ For Spinal Injuries Bladder Problems:

Q.रीढ़ की हड्डी का कौन सा भाग मूत्राशय को नियंत्रित करता है?

C1से C5 वाले चोट के स्तर ।
D1 से D7 वाले चोट के स्तर
L1 से L12 वाले चोट के स्तर

Q.रीढ़ की हड्डी का कौन सा स्तर मूत्राशय के कार्य को नियंत्रित करता है?

C1से C5 वाले चोट के स्तर ।
D1 से D7 वाले चोट के स्तर
L1 से L12 वाले चोट के स्तर

Q.रीढ़ की हड्डी की नसें जो मूत्राशय को नियंत्रित करती हैं।

रीढ़ की हड्डी की तांत्रिका तंत्र नस।

निष्कर्ष:-

आज के इस लेख में हमने (Spinal Injuries Bladder Problems) रीढ़ की हड्डी की चोट यूटीआई लक्षण,मूत्र प्रतिधारण रीढ़ की हड्डी का संपीड़न स्तर और रीढ़ के हड्डी में चोट के बाद मूत्राशय नियंत्रण पर विस्तार से जानकारी साझा किया है आपको यह लेख कैसा लगा।
अगर आपको यह जानकारी अच्छा लगा है और आपको यह हेल्प किया है तो आप इसे अपने किसी अन्य साथी या स्पाइनल इंजुरी मित्र को शेयर करें।

धन्यवाद।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top